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शोर मंजिल करीब देश-काल-परिस्थिति अनुरूप जीती थक बन जाती हूं राह जीती हूं तकनीक अलग लिए जाती गम हौंसला संग्रह के आलय परिष्कृत रूप पुरानी धरोहर विश्वास अपने

Hindi मंजिल ही जीती जाती Poems